Wednesday, March 28, 2018

भ्रम

यदि आप अंधकार में हैं
तो स्वयं आपको
अंधकार से बाहर निकलने का प्रयास करना पड़ेगा,

अगर आप यह सोच रहे हैं
कि -
कोई कुदरती चमत्कार होगा, और आप बाहर निकल आयेंगें
तो यह, आपका भ्रम भी हो सकता है,

चलो कुछ देर के लिए हम यह मान भी लें
कि -
यह भ्रम नहीं है,

तो, सच्चाई तो यह भी है
कि -
कुदरती चमत्कारों की कोई समय सीमा नहीं होती
तो क्या, तब तक आप अंधकार में बैठे रहेंगें ??

- श्याम कोरी 'उदय'

4 comments:

Dhruv Singh said...

आदरणीय / आदरणीया आपके द्वारा 'सृजित' रचना ''लोकतंत्र'' संवाद मंच पर 'सोमवार' ० २ अप्रैल २०१८ को साप्ताहिक 'सोमवारीय' अंक में लिंक की गई है। आमंत्रण में आपको 'लोकतंत्र' संवाद मंच की ओर से शुभकामनाएं और टिप्पणी दोनों समाहित हैं। अतः आप सादर आमंत्रित हैं। धन्यवाद "एकलव्य" https://loktantrasanvad.blogspot.in/

टीपें : अब "लोकतंत्र" संवाद मंच प्रत्येक 'सोमवार, सप्ताहभर की श्रेष्ठ रचनाओं के साथ आप सभी के समक्ष उपस्थित होगा। रचनाओं के लिंक्स सप्ताहभर मुख्य पृष्ठ पर वाचन हेतु उपलब्ध रहेंगे।

निमंत्रण

विशेष : 'सोमवार' ० २ अप्रैल २०१८ को 'लोकतंत्र' संवाद मंच अपने सोमवारीय साप्ताहिक अंक में आदरणीय 'विश्वमोहन' जी से आपका परिचय करवाने जा रहा है।


अतः 'लोकतंत्र' संवाद मंच आप सभी का स्वागत करता है। धन्यवाद "एकलव्य" https://loktantrasanvad.blogspot.in/

Ritu Asooja Rishikesh said...

बहुत सुंदर प्रेरक रचना ,
बिलकुल सही कहाँ श्याम कोरी जी अंधेरों से निकलना है तो स्वयं ही प्रयत्न करना होगा ।

शुभा said...

वाह!बहुत खूब ।

Ravindra Singh Yadav said...

आपका यथार्थवादी चिंतन हमें राह दिखाता है. विचारणीय रचना. बधाई.