Thursday, September 29, 2016

कथनी औ करनी ... !

इश्क में.. कारीगिरी.. कभी हमने भी की थी 'उदय'
मगर अफसोस.. कहीं-कहीं.. रंग फीका रह गया ?
...
आज फिर शाम से घिर आया था उनकी यादों का नशा
गर .... हम .... कॉकटेल न करते ..... तो उतरता कैसे ?
...
वो थे तो मेरे करीब .... पर ..... हर पल खामोश थे
कुछ इस तरह के भी माजरे, मेरे दिल के करीब थे ?
...
न .. मत ढूंढों .. तुम ... अब आसमां में सुरागां
कहाँ अब ... कथनी औ करनी ... एक लगे है ?
...
खटिया खड़ी न हो जाए, बस यह डर सता रहा है 'उदय'
वर्ना.. कौन नहीं जानता, खाट से कितना परहेज है हमें ? 

2 comments:

राकेश कौशिक said...

वाह वाह - क्या बात है सर

Asha Joglekar said...

वाह बहुत सुंदर.