Sunday, June 26, 2016

कुछ न कुछ ... तो ... जरूर ... ???

कुछ कमियाँ ...
कुछ नादानियाँ रही होंगी

कुछ भरोसे की ...
तो कुछ आशाओं की बात रही होगी

कुछ न कुछ तो
जरूर
अटपटा ... अनसुलझा-सा ... रहा होगा
हमारे दरमियाँ

वर्ना ... टूट नहीं सकता था
रिश्ता हमारा,

क्यों ?

क्योंकि -
पंखुड़ियों-सा नहीं था
शीशे-सा नहीं था
मिट्टी-सा ... भी .... नहीं था

गर ... था ... तो
सोने-सा था ...
चांदी-सा था
रिश्ता ... हमारा ... साथ हमारा ?
कुछ न कुछ ... तो ... जरूर ... ???

~ श्याम कोरी 'उदय'

1 comment:

yashoda Agrawal said...

आपकी लिखी रचना आज "पांच लिंकों का आनन्द में" बुधवार 29 जून 2016 को लिंक की गई है............... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!