Monday, August 4, 2014

छोटी-सी कहानी ...

हम जानते हैं, ये टेड़े-मेड़े लोगों की बस्ती है 'उदय'
यहां सीधे-सच्चे, फिसल-फिसल के गिर पड़ते हैं ?

पता नहीं आज कौन किसके साथ है 
विकास का मुद्दा, एक अलग बात है ?
कुछ इस तरह का नाता है उनका हमसे
दोस्ती, वफ़ा, फरेब, सब साथ-साथ हैं ?
अपुन ने तो 'उदय', गुरुओं का गुरु बनने की ठानी है
क्योंकि - चेले-चपाटों की, होती छोटी-सी कहानी है ?
खुद को खुद ही तराश लो यारा
कहीं ऐसा न हो वक्त तराशने पे अड़ जाए ?

2 comments:

Prasanna Badan Chaturvedi said...

उम्दा और बेहतरीन ...
नयी पोस्ट@जब भी सोचूँ अच्छा सोचूँ

प्रतीक माहेश्वरी said...

हाँ खुद को ही तराशना होगा..