Wednesday, June 18, 2014

आशिक़ी ...

सन्न है, सन्नाटा है
चँहू ओर भन्नाटा है ?

रोज ……… वही अफ़साने, वही तराने
बस, समझ लो, मुहब्बत है हमें उनसे ?
तेरी आशिक़ी की सौं,
ज़िंदा रहेंगे हम, मिलते रहेंगे हम ?

2 comments:

प्रतीक माहेश्वरी said...

मोहब्बत ऐसी ही चीज़ है!

संजय भास्‍कर said...

............. अनुपम भाव संयोजन
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