Wednesday, February 19, 2014

मारा-मारी …

सदनों में … आयेदिन 
हो रही, चल रही 
धक्का-मुक्की, झूमा-झटकी, फाड़ा-फाड़ी 
पटका-पटकी, मारा-मारी … 
के लिए भी 
कुछ सख्त क़ानून बनाये जाएँ 'उदय' 
कहीं ऐसा न हो 
किसी दिन,  
किसी दिन से … वहाँ 
हत्या, हत्या के प्रयास … शुरू हो जाएँ ?

2 comments:

राजेंद्र कुमार said...

आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (20.02.2014) को " जाहिलों की बस्ती में, औकात बतला जायेंगे ( चर्चा -1530 )" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें, वहाँ आपका स्वागत है, धन्यबाद ।

प्रवीण पाण्डेय said...

पीड़ापूर्ण घटनाक्रम।