Wednesday, February 5, 2014

कोर्ट मार्शल ...

बे-वजह, क्यूँ तड़फ रहे हो खामोशियों में 
आँखों से ही सही, कुछ कह के तो देखो ?
भईय्या आज से अपुन भी समाजसेवी हो गए हैं 
खुद अपुन ने ही, 
अपने नाम के नीचे समाजसेवी लिख लिया है ? 
… 
सच ! हम भ्रष्ट सरकारों के आदि हो गए हैं 'उदय' 
गिरने दो, इकलौती……एक ईमानदार सरकार ? 
… 
सच ! न कोई खता, 
और न कोई कुसूर है हमारा 
फिर भी, 
मुहब्बत की कचहरी में 
है आज हमारा कोर्ट मार्शल ? 
… 

2 comments:

Rakesh Kaushik said...

मुहब्बत की कचहरी - waah

प्रवीण पाण्डेय said...

जय हो, शुभकामनायें।