Saturday, February 22, 2014

गुलामी ...

सच ! यह भी उनका, एक और आत्मघाती कदम है 
सत्ता छिन जाने के बाद, फिर से उसे दबोच लेना ?
… 
व्यक्तिगत स्वार्थों को, छोड़ने को कोई तैयार नहीं है
जबकि, सब जानते हैं, दोनों चोर हैं,… महाचोर हैं ?
… 
कहीं खुशी, तो है कहीं मातम सा आलम 
ये कैसा बंटवारा है, ये कैसी सियासत है ?
… 
कैद तो होनी ही थी इसलिये हमने 'उदय' 
उनकी गुलामी क़ुबूल ली ?
… 
'आम आदमी' का माखौल उड़ाने वालों को पुरुस्कृत किया जाए 
क्योंकि - 
उन्हें  … 
'चाय-औ-दूध' की प्रसंशा के ऐबज में कुछ मिलने वाला नहीं है ?
… 

1 comment:

प्रवीण पाण्डेय said...

रोचक और सामयिक..