Thursday, February 14, 2013

बासंती हवा ...


सिर्फ ... न इधर, न उधर ...
फिर किधर ? 
चहूँ ओर ... 
धरा, आसमां, लोक, परलोक ... 
सब जगह ... 
क्यों ? ... कैसे ?? 
बस,... हवा हूँ ... बासंती हवा !!

4 comments:

ARUN SATHI said...

khoob...
बासंती हवा !

Shiv Kumar said...

वसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं

Rajendra Kumar said...

बसन्त पंचमी की हार्दिक शुभ कामनाएँ!बेहतरीन अभिव्यक्ति.सादर नमन ।।

kavita verma said...

basant panchami ki bahut bahut shubhkamnaye..