Wednesday, February 13, 2013

मिस कॉल ...


छिप-छिप के ही मत मुस्कुराया करो 
कभी,....... नजर भी हो जाया करो ?
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रेवड़ी भी, कभी इस रफ़्तार से नहीं बंटती हैं 'उदय' 
जिस रफ़्तार से, अपने मुल्क में हो रहे घोटाले हैं ? 
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लो, वो इत्ती-सी बात पे,...... कल से नाराज हैं 'उदय' 
"किस-डे" निकल गया, क्यों "किस" दी नहीं हमको ? 
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उफ़ ! ये जनतंत्र है, या चौसर की बिसात है 'उदय' 
जहां, कदम-कदम पे घोटालेबाजों की पौ-बारह है ? 
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सुनो, तुम अपनी मुहब्बत की अर्जी वापस ले लो 
मम्मी कहती हैं, अभी मेरे दूध के दांत टूटे नहीं हैं 
... 
उन्ने, सुबह-सुबह ही मिस कॉल से दस्तक दी है 
अब आज के,.....सारे प्रोग्राम पोस्टपोन समझो ?