Monday, November 12, 2012

जगमग-जगमग ...


सच ! आज, तेरे होने बस से 
जगमग-जगमग हो रहा 
है ये जहां 
कल जब तुम नहीं थे ... 
तब, 
सितारों से भरा 
ये आसमां, 
भी ...
मायूस हमको लग रहा था !!

5 comments:

Devdutta Prasoon said...

सुन्दर रहस्यवाद !

सूर्यकान्त गुप्ता said...

चार लाइन की सुन्दर रचना ....

दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं ... jay johaar...

वन्दना said...

मन के सुन्दर दीप जलाओ******प्रेम रस मे भीग भीग जाओ******हर चेहरे पर नूर खिलाओ******किसी की मासूमियत बचाओ******प्रेम की इक अलख जगाओ******बस यूँ सब दीवाली मनाओ

दीप पर्व की आपको व आपके परिवार को ढेरों शुभकामनायें

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार said...




ஜ●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬●ஜ
♥~*~दीपावली की मंगलकामनाएं !~*~♥
ஜ●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬●ஜ
सरस्वती आशीष दें , गणपति दें वरदान
लक्ष्मी बरसाएं कृपा, मिले स्नेह सम्मान

**♥**♥**♥**● राजेन्द्र स्वर्णकार● **♥**♥**♥**
ஜ●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬●ஜ

प्रवीण पाण्डेय said...

तुम्हारी याद संबल..