Sunday, September 9, 2012

जिन्दगी का सफ़र ...

नहीं मिलूंगा, 
मैं तुमको सन्नाटों में 
गर ढूंढोगे, तो -
तूफानों में, 
मैं तुमको मिल जाऊँगा ? 

आज नहीं तो कल ... 
ये दुनिया देखेगी 
जुबां-जुबां पे -
चर्चा में ...
मैं तुमको मिल जाऊँगा ?

गर चाहोगे 
तुम भूलना मुझको 
तो हर कोशिश -
नाकाम तुम्हारी हो जायेगी ?
क्योंकि - 

जीवन की, हर बेला में ... 
राह दिखाते, 
राह चलाते, 
कदम कदम पे 
मैं तुमको मिल जाऊँगा ???