Thursday, April 5, 2012

रु-ब-रु ...

जब जब तुझे देखता था
जेहन में
एक धुंधली-सी
अजीब-सी
तस्वीर उमड़ पड़ती थी !
आज जब देखा
रु-ब-रु
एक भेड़िये को
तो
सच ! तेरी याद आ गई !!

4 comments:

परमजीत सिहँ बाली said...

वाह! बहुत बढिया!!

Rajesh Kumari said...

sach me kadva sach hai.

प्रतीक माहेश्वरी said...

आह.. सच भी कहाँ-कहाँ दिखता है मुआ!

प्रवीण पाण्डेय said...

कुछ चेहरे बड़े जाने पहचाने लगते हैं।