Wednesday, April 18, 2012

हुनर ...

यकीनन तुम पे नहीं, तुम्हारे दिल पे अब भी एतबार है हमको
आह सुन के हमारी, वो कराह उट्ठेगा !!
...
लू की आंधियाँ चलें, या हो अब ताप की बारिश 'उदय'
जब तक, है प्याज की चटनी का असर, किसे पर्वा है !
...
हमने तो अब तक, सिर्फ बेचने का हुनर सीखा है 'उदय'
कभी ऐंसा सौदा नहीं करते, जो नुक्सान दे जाए !!

7 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

खुद भी नहीं जानते कि हमारा हुनर क्या है।

यशवन्त माथुर said...

कल 21/04/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल (यशोदा अग्रवाल जी की प्रस्तुति में) पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

सुमन कपूर 'मीत' said...

waah ..

Onkar said...

sundar panktiyan

Dr.Ashutosh Mishra "Ashu" said...

samajhdaari ka sauda..behtarin

Mamta Bajpai said...

बहुत खूब कहा ...बधाई

madhu singh said...

behatareen prastuti