Monday, January 30, 2012

रण है ! विजय हैं हम !!

हर घड़ी, हैं मोर्चे पे हम
रण है ! विजय हैं हम !!

दिलों में धडकनें हैं हम
रण है ! विजय हैं हम !!

खौफ का नाम हैं हम
रण है ! विजय हैं हम !!

आख़िरी आस भी हैं हम
रण है ! विजय हैं हम !!

जुनूं हैं, जान भी हैं हम
रण है ! विजय हैं हम !!

विश्वास के प्रतीक हैं हम
रण है ! विजय हैं हम !!

फक्र का दौर भी हैं हम
रण है ! विजय हैं हम !!

वतन
की आन हैं हम
रण है ! विजय हैं हम !!

वतन की शान हैं हम
रण है ! विजय हैं हम !!

2 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

सबके मन में बस यही भाव हैं अब..

परमजीत सिँह बाली said...

सुन्दर रचना।