Saturday, December 3, 2011

चुनावी लफड़े ...

क्या करूँ ... मजबूर हूँ
न नेता हूँ
न अभिनेता हूँ
न सेठ हूँ
न साहूकार हूँ
और तो और -
न ही मुहल्ले का रंगदार हूँ !

अदना सा -
एक साधारण मतदाता हूँ
जिसका जी चाहेगा -
अद्धी-पौब्बा
कम्बल-साईकल
बकरा-मुर्गा
दे दुआ के खरीद लेगा !

गर न हुआ तैयार -
बिकने के लिए
तो कोई न कोई -
गर्दन पकड़ के मुरकेट देगा
गर मैंने नहीं ठोका
तो वो खुद ही -
मेरा अंगूठा ठोक देगा
क्या करूँ
चुनावी लफड़े हैं ... मजबूर हूँ !!

2 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

क्या करें पर भाग तो लेना पड़ेगा।

ana said...

satik warnan....par sarkar ne aanmhe band kar rakhi hai.....aap kise padhaayenge