Thursday, October 20, 2011

रंग ...

कभी बदरंग से थे -
जीवन
ख्याल
विचार
भावनाएं
सब बदरंग से थे
पर अब
रंग
मुझे छूने लगे हैं
मुझे भाने लगे हैं
मेरी आँखों में बसने लगे हैं !

अब मन
रंगों को देख-देख के -
मचलने लगा है
ललचाने लगा है
मेरे -
विचार
ख्याल
इरादे
भावनाएं
रंग में डूबने लगे हैं
रंग से होने लगे हैं !

सच ! तुम्हारे -
विचारों ने
प्रेम ने
मुस्कान ने
समर्पण ने
स्पर्श ने
आलिंगन ने
मुझे रंगीन कर दिया है !!

2 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

सुन्दर और कोमल।

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत सुन्दर रचना ..