Sunday, October 23, 2011

... खुद ही पूंछ लो उनसे !!

कौन कहता है कि तुम आ के छू लो मुझको
सच ! मैं पारस नहीं हूँ, ये मैं जानता हूँ !!
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सच ! फना होने का, गर कोई सलीखा होता
इतना तो तय था कि, कोई न आशिक होता !
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जितनी मर्जी तुम्हारी, आजमा लो मुझको
सच ! मैं हीरा हूँ, जी चाहे तराशो मुझको !
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तुम फना होने की तहजीब सिखा दो मुझको
जी तो चाहे है कि आज फना हो जाऊँ !!
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कहते-सुनते रहे हैं कि क्या बात है
गर बात होती, तो कुछ बात होती !
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न तो कल ही था, और न ही आज हूँ उनका
सच ! गर चाहो तो, खुद ही पूंछ लो उनसे !!
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गर चाहूँ भी तो कैसे खुद को साबित कर दूं
सच ! लोग कहते हैं कि बहुत छोटा हूँ मैं !!
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लोग कहते हैं कि नज़रों का धोखा है सनम
कैसे मान लें, जब तक उनसे न पूंछ लें हम !
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गर चाहें तो उन्हें खुद ही तराश लें हम
पर बिना पूछें ये खता कैसे कर लें हम !
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जी न चाहे, तब भी तू मुझसे मुहब्बत कर ले
सच ! बिना बोले ही, तुझपे मैं फना हो जाऊं !

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