Wednesday, October 19, 2011

चलो चलें, कहीं दूर चलें ...

चलो चलें, कहीं दूर चलें
दूर गगन के पार चलें
तुम चलो, हम चलें
एक नया संसार गढ़ें
जहां प्यार के फूल खिलें
खुशियों के जहां ढोल बजें
तुम चलो, हम चलें
मीत बनें, हम गीत बनें
चलो चलें, कहीं दूर चलें
दूर गगन के पार चलें !!

3 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

बहुत खूब..

अनुपमा पाठक said...

सुन्दर!

दिलबाग विर्क said...

आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
कृपया पधारें
चर्चा मंच-673:चर्चाकार-दिलबाग विर्क