Saturday, October 29, 2011

सहजता ...

आज के दौर में
सहज होना कठिन है
या फिर
लोग सहज होना नहीं चाहते
सोच रहा था
सोचते सोचते सोचा
कि -
शायद ! लोग
सहज होना ही नहीं चाहते !
इसके पीछे कोई वजह होगी
फिर यह सोचने लगा
पर, नतीजतन यह लगा
कि -
जो लोग खुद को
थोड़ी-सी भी ऊँचाई पर -
समझते हैं
महसूस करते हैं
या होते हैं
वे सहज होना ही नहीं चाहते
क्यों, क्योंकि -
सहज होने से, शायद
वे खुद को -
ऊंचा न महसूस कर सकें !

5 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

सहज होना ही असहज हो गया है।

अरुण चन्द्र रॉय said...

बहुत गंभीर कविता...

संगीता पुरी said...

वे सहज होना ही नहीं चाहते
क्यों, क्योंकि -
सहज होने से, शायद
वे खुद को -
ऊंचा न महसूस कर सकें !

आज के लोगों के मनोभाव को पकडा है आपने !!

वाणी गीत said...

नाम एक अनुरूप ही कड़वा सच है ...सहज होने में अपने श्रेष्ठता का लोभ रह जाता है !

वन्दना said...

गंभीर चिन्तन्।