Friday, June 10, 2011

... जाते जाते, रूह और जमीं, एक-दूजे से खफा हो गए !!

हर रंग से जुदा हैं, रंग जिसपे खुद--खुद फ़िदा हैं
बेटियाँ इस धरा में, रंग-खुशबू-प्रेम का आसमां हैं !
...
जाने क्या कहा तुमने, जाने क्या सुना हमने
क्या समझें, क्या समझें, समझना भी जरुरी है !
...
वफ़ा करते करते, जाने कब, हम बेफवा हो गए
जाते जाते, रूह और जमीं, एक-दूजे से खफा हो गए !
...
इन आँखों की गुस्ताखियों ने, मुझे तेरा दीवाना बना दिया
वरना, बता, तू खुद ही मुझे, तुझ में ऐसा रक्खा क्या है !!

7 comments:

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

पहला वाला सबसे बढ़िया.

Dinesh Mishra said...

निःशब्द .......बहुत सुंदर !!

Manpreet Kaur said...

बहुत ही अच्छा पोस्ट है ..... आभार .मेरे नयी पोस्ट पर आपका स्वागत है !
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AK SHUKLA said...

उदय जी सुंदर रचना | बधाई |

Patali-The-Village said...

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति| धन्यवाद|

शहरोज़ said...

prbhavi!! bahut achcha laga dinon bad aaya hun. samay ki khoob qillat hai bhai.

प्रवीण पाण्डेय said...

वाह।