Saturday, May 7, 2011

अपेक्षाएं और उपेक्षाएं ...

कुछ लोगों ने
झूठे, मान, सम्मान के लिए
अपने अपने जहन में
अपेक्षाएं
सहेज, संजो, पाल के रख लीं !

या, यूं कहें
सम्मान के लिए
भले झूठा-मूठा ही सही
सम्मान तो सम्मान, होता है
झूठे सम्मान के लिए
नई रणनीति बना कर
स्थापित व प्रतिभाशाली
व्यक्तित्वों की, उपेक्षाएं, शुरू कर दीं !

कोई मापदंड नहीं, कोई नीति नहीं
जो मन में आया
उसे ही, लाग-लपेट कर
प्रतिभाओं, प्रतिभाशाली व्यक्तित्वों को
नींचा, ओछा, बेकार
बता बता कर, चिल्ला चिल्ला कर
उपेक्षित कर दिया !

हुआ ये, कि
उपेक्षाएं और अपेक्षाएं
झूठे लोगों की -
झूठी ही सही, अमर हो गईं !!

4 comments:

अरुण चन्द्र रॉय said...

badhiya kavita...

संजय भास्कर said...

हमेशा की तरह आपकी रचना जानदार और शानदार है।

प्रवीण पाण्डेय said...

यही क्रम हर जगह भ्रम फैलाये है।

ANJAAN said...

बहुत खूब , मैं ब्लॉग जगत में नया हूँ सो मेरा मार्गदर्सन करे..
www.anjaan45.blogspot.com