Monday, April 4, 2011

सच ! जिन्दगी, उदास है मेरी !!

एक हंसी चेहरा तुझसा
सारे जग में
सच ! कहीं नहीं
दिखता !
वो हंसीं, वो मुस्कान
कहीं दिखती नहीं मुझको
हैं, बहुत हैं, हंसी चेहरे
पर वो कशिश, वो नजाकत
जो तुझमें, तेरी अदाओं में है
कहीं दिखती नहीं मुझको !
गर मैं चाहूँ, हंसना
तेरे बगैर हंस नहीं पाता
तेरे सांथ होने से, जिन्दगी
कितनी हंसी, खुशमिजाज थी !
गर, तुझ-सी, हंसीं, मुस्कान,
कशिश, नजाकत, मिल भी जाए
पर, तुझ-सा, आलिंगन, चुम्बन
गर्म सांसें, तपता बदन, खौलते जज्बे
इनका क्या, क्या मिल पायेंगे !
शायद नहीं, मुश्किल लगते हैं
तेरे जाने, पास नहीं होने से
सच ! जिन्दगी, उदास है मेरी !!

4 comments:

अरुण चन्द्र रॉय said...

प्रेम के भाव से बाहरी कविता... खूबसूरत है..

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

तू नहीं तो जिन्दगी में और क्या रह जायेगा..

प्रवीण पाण्डेय said...

तू पास होती,
तो आस होती।

दर्शन कौर धनोए said...

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति !