Wednesday, March 30, 2011

स्पर्श ...

तुमने जब जब
मेरे कोमल अंगों को
अपने कठोर हांथों से
स्पर्श किया
छुआ, टटोलना चाहा
सच ! मैं कुछ पल को
सिहर
सी गई
डरी, सहमी रही
पर कुछ पल में ही
तुम्हारे हांथों का स्पर्श
मुझे -
मन को भाने लगा !!

5 comments:

संजय भास्कर said...

वाह ! बेहद खूबसूरती से कोमल भावनाओं को संजोया इस प्रस्तुति में आपने ...

Manpreet Kaur said...

बहुत ही उम्दा शब्द है ! हवे अ गुड डे ! मेरे ब्लॉग पर जरुर आना !
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अरुण चन्द्र रॉय said...

एक नई तरह की कविता...

Apanatva said...

sunder abhivykti.

प्रवीण पाण्डेय said...

सुन्दर पंक्तियाँ।