Friday, March 18, 2011

खुद को बेच भी दो, खुद के बने भी रहो !!

विकीलीक्स के खुलासे किसी चमत्कार से कम नहीं हैं

उफ़ ! शायद भारतीय मीडिया की पहुँच उतनी नहीं है !

...

सारे के सारे बिक गए हैं, कोई ईमानदार नहीं दिखता

हे 'भगवन' देश का कोई माई-बाप नहीं दिखता !

...

सारा राजनैतिक सिस्टम सड़ चुका है

कहीं देश में महामारी न फ़ैल जाए !

...

हम सब खुद को बेच चुके हैं 'उदय'

गुलाम कहाँ मर्जी का मालिक हुआ है !

...

ये सौदे भी क्या खूब सौदे हैं 'उदय'

खुद को बेच भी दो, खुद के बने भी रहो !!

7 comments:

kshama said...

Karara vyang hai!
Holi mubarak ho!

प्रवीण पाण्डेय said...

झन्नाट वाक्य है।

Deepak Saini said...

होली की शुभकामनायें।

राज भाटिय़ा said...

पहले आप होली की बधाई लेलो जी...
आप को सपरिवार होली की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!

bilaspur property market said...

पिचकारी की धार,
गुलाल की बौछार,
अपनों का प्यार,
यही है यारों होली का त्यौहार.
होली की ढेरों बधाई व शुभकामनायें ...जीवन में आपके सारे रंग चहकते ,महकते ,इठलाते ,बलखाते ,मुस्कुराते ,रिझाते व हसाते रहे

manish jaiswal
bilaspur
chhattisgarh

Patali-The-Village said...

होली पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ|

राजकुमार ग्वालानी said...

रंगों की चलाई है हमने पिचकारी
रहे ने कोई झोली खाली
हमने हर झोली रंगने की
आज है कसम खाली

होली की रंग भरी शुभकामनाएँ