चलो आ गया मौसम बसंत का
अब दरख़्त की छाँव भाने लगेगी !
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दिल बेचैन है, काश ! तुम ही बता देते हमें
सूरत से ज्यादा भली, तेरी सीरत क्यों है !
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सच ! कोई कह रहा है खुद को बदल लो 'उदय'
बहुत हो गया 'कडुवा', कुछ 'मीठा' भी लिखो !
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भ्रष्टाचारी परेशान हैं कहीं कोई उन्हें जेल में न ठूंस दे
इसलिए वे आपस में एक-दूसरे को तेल लगा रहे हैं !
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बात में दम है, मीडिया का कोई गुनाह नहीं है 'उदय'
सच ! वे बिके नहीं हैं, उन्हें खरीदा गया है !
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जब भी देखता हूँ तेरा मुस्कुराता चेहरा
सच ! खुदा के दीदार से हो जाते हैं !
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भले-बुरे की बातें अब बेईमानी लगे हैं 'उदय'
चहूँ ओर मौकापरस्ती का बोलबाला हुआ है !
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भ्रष्ट ! कोई डाल दे चाहे जितनी कीचड इन पर
कह देंगे, दाग अच्छे हैं, बुरा न मानो होली है !
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बातें सुन लीं, गांठ बांध कर रख ली है
उफ़ ! फुर्सत कहाँ, जो अमल में लाएं !
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भ्रष्टाचारियो की अकड़ देखो, अभी भी अकड़े हुए हैं
क्यों न अकड़ें, पूरी फ़ौज जो उन्हें बचाने में लगी है !
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चलो कोई बात नहीं, समझ नहीं पाए जज्बात तिरे
काश ! समझ जाते तो 'खुदा' बन गए होते !
6 comments:
दिल बेचैन है, काश ! तुम ही बता देते हमें
सूरत से ज्यादा भली, तेरी सीरत क्यों है !
...vah...bahut badhiya.
उदय जी ,कडुवा सच!
कूंए में ही भांग पड़ी है"उदय"
कौन बदल पाएगा इसका पानी।
@ललित शर्मा
कुए में भांग, हमने ही रख छोडी है
होली करीब है, हम-तुम डुबकी लगायेंगे !!
बड़े बड़े खेल,
तड़प रही जेल।
हमारी पसन्द
बात में दम है, मीडिया का कोई गुनाह नहीं है 'उदय'
सच ! वे बिके नहीं हैं, उन्हें खरीदा गया है !
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