Monday, February 7, 2011

इसलिए वे आपस में एक-दूसरे को तेल लगा रहे हैं !!

चलो गया मौसम बसंत का
अब दरख़्त की छाँव भाने लगेगी !
...
दिल बेचैन है, काश ! तुम ही बता देते हमें
सूरत से ज्यादा भली, तेरी सीरत क्यों है !
...
सच ! कोई कह रहा है खुद को बदल लो 'उदय'
बहुत हो गया 'कडुवा', कुछ 'मीठा' भी लिखो !
...
भ्रष्टाचारी परेशान हैं कहीं कोई उन्हें जेल में ठूंस दे
इसलिए वे आपस में एक-दूसरे को तेल लगा रहे हैं !
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बात में दम है, मीडिया का कोई गुनाह नहीं है 'उदय'
सच ! वे बिके नहीं हैं, उन्हें खरीदा गया है !
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जब भी देखता हूँ तेरा मुस्कुराता चेहरा
सच ! खुदा के दीदार से हो जाते हैं !
...
भले-बुरे की बातें अब बेईमानी लगे हैं 'उदय'
चहूँ ओर मौकापरस्ती का बोलबाला हुआ है !
...
भ्रष्ट ! कोई डाल दे चाहे जितनी कीचड इन पर
कह देंगे, दाग अच्छे हैं, बुरा मानो होली है !
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बातें सुन लीं, गांठ बांध कर रख ली है
उफ़ ! फुर्सत कहाँ, जो अमल में लाएं !
...
भ्रष्टाचारियो की अकड़ देखो, अभी भी अकड़े हुए हैं
क्यों अकड़ें, पूरी फ़ौज जो उन्हें बचाने में लगी है !
...
चलो
कोई बात नहीं, समझ नहीं पाए जज्बात तिरे
काश ! समझ जाते तो 'खुदा' बन गए होते !

6 comments:

arvind said...

दिल बेचैन है, काश ! तुम ही बता देते हमें
सूरत से ज्यादा भली, तेरी सीरत क्यों है !
...vah...bahut badhiya.

ब्लाँग आँफ द मँथ फाऊन्डेशन said...

उदय जी ,कडुवा सच!

ललित शर्मा said...

कूंए में ही भांग पड़ी है"उदय"
कौन बदल पाएगा इसका पानी।

'उदय' said...

@ललित शर्मा
कुए में भांग, हमने ही रख छोडी है
होली करीब है, हम-तुम डुबकी लगायेंगे !!

प्रवीण पाण्डेय said...

बड़े बड़े खेल,
तड़प रही जेल।

संजय बेंगाणी said...

हमारी पसन्द
बात में दम है, मीडिया का कोई गुनाह नहीं है 'उदय'
सच ! वे बिके नहीं हैं, उन्हें खरीदा गया है !