Monday, January 31, 2011

दुपट्टा ...

तुम्हारा दुपट्टा
हवा
के झौंके संग
सरकने
लगा !

नीचे, और नीचे
मेरी
निगाह
थम
सी गई !

मैं देखता रहा
कुछ
ललक थी
तुम्हें
देखने की !

सच ! मैं देखता रहा
सीने से, सरकता

तुम्हारा
दुपट्टा ... !!

9 comments:

Er. सत्यम शिवम said...

बहुत ही सुंदर प्रस्तुति......

arvind said...

koi duptta hataakar to dekhe aapki aankhon me chaahat hi chaahat hai.....सुंदर प्रस्तुति

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत सुन्दर भावों से सजी अच्छी पेशकश

अरुण चन्द्र रॉय said...

sundar ! bahut badhiya!

सुरेश शर्मा (कार्टूनिस्ट) http://sureshcartoonist.blogspot.com/ said...

हमेशा की तरह बेजोड़, बेहतरीन और
बेमिशाल प्रस्तुति के लिए अत्यंत आभार !

ललित शर्मा said...

छा गए गुरु

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

बल्ले बल्ले...

प्रवीण पाण्डेय said...

चाहत क्या न बहा दे।

राज भाटिय़ा said...

नाईस नाईस नाईस