Saturday, August 7, 2010

मुखौटा

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काम न आई वतन में, सत्य की वाणी 'उदय'
झूठ-फ़रेव का मुखौटा, बहुत काम आ रहा है ।

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4 comments:

कविता रावत said...

Yatharth chintan se utpan panktiyan

महेन्द्र मिश्र said...

बहुत बढ़िया शेर...

शहरोज़ said...

काम न आई वतन में, सत्य की वाणी 'उदय'
झूठ-फ़रेव का मुखौटा, बहुत काम आ रहा है ।

क्या सही सही कहा कडुआ लगने दें.सच कडुआ होता ही है.!
समय हो तो अवश्य पढ़ें .ब्लॉग जगत में मची घमासान के विरुद्ध.
शमा-ए-हरम हो या दिया सोमनाथ का
http://saajha-sarokaar.blogspot.com/2010/08/blog-post.html

राज भाटिय़ा said...

बिलकुल सही कहा आप ने, धन्यवाद