Sunday, July 25, 2010

शेर

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जब धडकनें दिलों की सरेआम हो जाएं
तब कर लो गुनाह ये कहकर, मोहब्बत है - मोहब्बत है।
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5 comments:

arvind said...

जब धडकनें दिलों की सरेआम हो जाएं
तब कर लो गुनाह ये कहकर, मोहब्बत है - मोहब्बत है।...vaah aapne to kamaal kar diyaa.

दिगम्बर नासवा said...

जितना छुपाओ मुहब्बत बयान हो ही जाती है ...

shama said...

Sundar panktiyan!

अंजोर दास said...

बढियां शेर लिखते हैं।

फ़ोटु के तौ 100 लम्बर दिए

Vivek VK Jain said...

first time landed here.........truly, meaning samajh nhi aya,