Sunday, June 13, 2010

... भूकंप के झटके मजाक बने !!!!

आजकल लोगों को हकीकत भी मजाक लगती है .... जहां भूकंप आया हो वहां के लोग जानते हैं क्या होता है ... पर मेरी कल की पोस्ट को लोगों (बुद्धिजीवियों) ने मजाक समझ लिया ... खैर कोई बात नहीं ... होता है अक्सर ऎसा होता है ... सच्चाई लोगों को इतनी आसानी से हजम नहीं होती है ... चलो खैर कोई बात नहीं आप भी इंतजार करो एक भूकंप का ... शायद आप सब को एहसास हो जाये ... झटके क्या होते हैं ...

... कुछ महानुभावों को ये लाल-हरी परी का असर लगा ... कुछ महानुभावों को ये गाडी की स्टेरिंग हिलती लगी ... और कुछ महानुभावों को हारर फ़िल्म का सीन लगा ... कुछ को झूला-झूलने जैसा लगा ... और कुछ लोगों को तो बात हजम ही नहीं हुई .... कुछ महानुभाव मेरे स्टूल की सलामती की बातें कहते दिखे ... चलो कोई बात नहीं ... होता है ... होता है ... सच्चाई कडुवी ही होती है ... हर कोई उसे गुटक व हजम नहीं कर सकता ... आज मैं स्वीकार करता हूं कि ... बुद्धिजीवी जिस बात को मान लें वह सही और जिसे न मानें वह ......... भूकंप के झटके मजाक बने !!!!

(संभवत: कुछ महानुभाव इस पोस्ट पर टिप्पणी करने से हिचकिचाएं ... कोई बात नहीं )

10 comments:

देव कुमार झा said...

हा हा, सही है. भूकम्प पर भी मजाक!!!
सही है उदय भाई.

kshama said...

Bhukamp hua tha ya nahi?

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

चलिए हमें तो आपकी बात पर विश्वास है...

Udan Tashtari said...

हमने तो बहुत गंभीरता से लिया था भाई. एक बार झेल चुके हैं जबलपुर का भूकंप.

M VERMA said...

भूकम्प के झटके तो आये ही थे

महेन्द्र मिश्र said...

उदय जी
सादर अभिवादन
बचपन से लेकर ९६ तक मै भी नहीं जनता था की भूकंप कैसा होता है ..सिर्फ किताबों में पढ़ा था . वर्ष ९७ में जबलपुर में भूकंप का प्रथम बार अनुभव किया . ६.५ रिएक्टर का भूकंप आया था .. उसके बाद माइनर दो भूकंप आये थे .. इस भूकंप में तबाही जो मंजर मैंने स्वयं मैंने अपनी आँखों से देखा और अनुभव किया है ....

'उदय' said...

@kshama
...आप कन्फ़्यूज न हों ... सत्य घटना है ... अभी तक तो पेपर व टेलिविजन पर पढा-सुना था ... पर स्वयं साक्षात महसूस करने का अनुभव हुआ ... मेरे जीवन का एक अनमोल क्षण है जिसे मैंने महसूस किया है ... तूफ़ानी हवा / बबंडर / मुसलाधार वारिश बगैरह बगैरह को अनेक बार सामने महसूस किया है पर भूकंप से धरती की कंपन महसूस करना ... एक अदभुत नजारा था ... मैंने लिखा है मुझे आश्चर्य ही हुआ कि ये क्या हुआ ... दूसरे दिन यदि पेपर में नहीं छपता तो ... बात आई-गई हो जाती ... खैर इतना ही कहूंगा ... एक अदभुत अनुभूति रही जो जीवन भर याद रहेगी !!!!

राजीव तनेजा said...

'उदय' जी आपने अपनी उस पोस्ट में लिखा था... "मतलब मैंने मौज-मस्ती के दरम्यान भूकंप के झटकों का आनंद ले लिया ... घोर, घनघोर, महाघोर आश्चर्य"...
उसी को पढकर मैंने भी मजाक में लिख दिया कि..."आपके मज़े हैं जो ऐसे झूला झूलते हुए पोस्ट लिखते हैं"..
आप बुरा मान जाएंगे...ऐसा सोचा ना था

संजय भास्कर said...

सत्य घटना है ...

वन्दना said...

aap sahi hi kah rahe honge ismein mazak kaisa? har koi to mahsoos nahi kar pata phir chahe ek hi ghar mein kailog kyun na hon ye to us waqt ki position par depend karta hai.hamne to kai bar mehsoos kiya hain.