Wednesday, May 26, 2010

कार्टूनिष्ट अजय सक्सेना "कुमार जलजला" की चपेट में !!!

.... लो भाई एक और घटना/दुर्घटना ... लोग मुझे कहते हैं "कुमार जलजला" का पीछा छोड दो ... मैं तो तैयार हूं ... पर कुमार जलजला को क्यों नहीं समझाते ???

.... ऎसा लगा कि वह "दिल्ली ब्लागर मिलन" के समय किसी ढाबा से "दाल-रोटी" खा कर निकल लिया ...पर वो निकला कहां ... फ़िर धमक आया है .... इस बार उसने निशाना बनाया है कार्टूनिष्ट अजय सक्सेना को ... उनके ब्लाग की पोस्ट फर्जी ब्लागरों का पुतला दहन...!... पर बे-वजह बिना ब्रेक की गाडी की तरह पिल पडा है वहां पर उसकी टिप्पणी ... लो खुद ही पढ लो भाई ....

Kumar Jaljala, May 25, 2010 10:49 AM

आपके ब्लाग में ऊपर कही दो भैंस शौक फरमा रही है। इन्ही भैंसों में से कोई एक आपकी अक्ल को चरने के लिए ले गई है। जनाब हमने तो सुना था कि पीएम का पुतला जलता है, डीएम का पुतला जलता है। पहली दफा देख रहे हैं कि लोग बेनामी लोगों का पुतला जला रहे हैं। यानी जिनका कोई नाम नहीं है उनका पुतला दहन... और वाह-वाह करने वाले हजरत भी आपको दाद दे रहे हैं... जरा अक्ल तो लगाइए.
आपको अभी पक्का और कायदे का कार्टूनिस्ट बनने में वक्त लगेगा. किसी उस्ताद से शागिर्दी लीजिए। ब्लाग पर तोते-मिट्ठू, कुत्ते-बिल्ली की फोटो चस्पा कर लेने से कोई कार्टूनिस्ट नहीं बन जाता है.

.... अब क्या कहें ... मुझे तो आप लोग चुप करा देते हो .... पर इस "कुमार जलजला" को क्यों नहीं समझाते ... उसकी आदत ही हो गई है "न्यूसेंस" फ़ैलाने की ... !!!!

16 comments:

सलीम ख़ान said...

gr8!

Suman said...

nice

Ratan Singh Shekhawat said...

ऐसे व्यक्ति को समझाने की कोई जरुरत ही नहीं | बस इनकी टिप्पणी अपने ब्लॉग पर देखो और सीधे डिलीट कर दो जैसा कि ब्लोगर मिलन सम्मलेन में खुशदीप सहगल जी ने सुझाया था |

M VERMA said...

ऐसे टिप्पणियों को मिटा देना चाहिये और कदापि उसको हाईलाईट करते हुए पोस्ट नहीं लिखना चाहिये.

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari said...

जिन्‍दाबाद, जिन्‍दाबाद ................

चण्डीदत्त शुक्ल said...

राम-राम!

मनोज कुमार said...

यथार्थ लेखन।

सूर्यकान्त गुप्ता said...

हरिओम तत्सत्।

राज भाटिय़ा said...

हे राम........

सुरेश शर्मा (कार्टूनिस्ट) said...

ब्लॉगजगत में कुछ ऐसे घुसपैठिये आ गए हैं जिन्हें एक ही काम है अपनी टिप्पणियों के द्वारा ब्लोगर को हत्सोसाहित करना, अजयजी बेहतर कार्टूनिस्ट हैं इस तरह की टिप्पणियां उनके लिए अनुचित है !

Udan Tashtari said...

इग्नोर करते रहिये न!

Kumar Jaljala said...

मैंने कल आपको दो टिप्पणियां की थी लेकिन पोस्ट नहीं चढ़ने की डर से आपने मेरी दोनों ही टिप्पणियां हटा दी.. खैर आलोचना सुनने की ताकत हर किसी में नहीं बल्कि बहुत से लोगों में नहीं होती है.
मैंने क्या गलत लिखा था- मैंने तो यही लिखा था कि यदि कोई कार्टूनिस्ट अच्छा नहीं है तो उसे अच्छा नहीं है कहने में क्या बुराई है. अजय सक्सेना ने कल बेमामियों का पुतला दहन करने को लेकर कार्टून बनाया था. आप सब सोचें कि कि आज तक पूरे विश्व में क्या बेनामियों का पुतला दहन हुआ है. पुतला उसी का दहन होता है जिसका नाम होता है. आखिर जो लोग पुतले को जलता हुआ देखेंगे वे यह तो पूछेंगे ही कि आखिर किसका पुतला दहन हो रहा है. यानी कुछ भी बकवास बनाना है तो बनाए जाओ. और ऊपर सुरेश शर्मा टाइप के कार्टूनिस्ट और बोल रहे है कि अजय साहब आरके लक्ष्मण के बाप है. चमचागिरी की हद है. य़ह देश तब तक सही नहीं हो सकता जब तक वह सही को सही और गलत को गलत नहीं बोलना सीख जाता. दोस्त भी यदि गलत है तो उसे सही समय पर सही बात बतानी चाहिए.

डॉ टी एस दराल said...

जलजला जी , ३१ मई का वादा मत भूल जियेगा । शुभकामनायें ।

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

श्याम जी, जलजला जी पर नाराज होने की आवश्यकता शायद नहीं है..

भूतनाथ said...

हा...हा...हा....हा....हू....हू.....हू.....हू.....हे.....हे.....हे.....हो....हो.....हो....गनीमत है कि किसी ने हमें वहां देखा नहीं....हम भी वहीँ रोशनदान में बैठे सबको टुकुर-टुकुर निहार रहे थे....अगर गलती से भी वहां सबके बीच टपक पड़ते तो सारे कार्यक्रम की वाट ही लग जाती....खैर मुबारक हो सबको यह सम्मलेन.....!!!

Raju said...

श्याम जी बुरा मत मानिए पर आप अपने आप से ही सोचिये की आप क्या कर रहे है हर रोज बस जलजला के नाम का जाप कर रहे है अरे ये सब छोड़ दीजिये अब आपको शोभा नहीं देता
बुरा लगे तो माफी