Saturday, May 22, 2010

अंतर्द्वंद

मन में चल रहा
अंतर्द्वंद

मुझे झकझोर रहा है
कभी हार, तो कभी जीत रहा है
ये द्वंद, सचमुच अंतर्द्वंद है
मन और मैं
हार उसकी या मेरी
जीत उसकी या मेरी ... !!!

11 comments:

संजय भास्कर said...

प्रशंसनीय रचना - बधाई

संजय भास्कर said...

dairy ke panno me to kavitao ka khajan chupa rakha hai sir ji...

Suman said...

nice

Kumar Jaljala said...

दिल्ली के ब्लागर इंटरनेशनल मिलन समारोह में भाग लेने के लिए पहुंचने वाले सभी ब्लागर साथियों को कुमार जलजला का नमस्कार. मित्रों यह सम्मेलन हर हाल में यादगार रहे इस बात की कोशिश जरूर करिएगा। यह तभी संभव है जब आप सभी इस सम्मेलन में विनाशकारी ताकतों के खिलाफ लड़ने के लिए शपथ लें। जलजला भी आप सभी का शुभचिन्तक है और हिन्दी ब्लागिंग को तथाकथित मठाधीशों से मुक्त कराने के एकल प्रयास में जुटा हुआ है. पिछले दिनों एक प्रतियोगिता की बात मैंने सिर्फ इसलिए की थी ताकि लोगों का ध्यान दूसरी तरफ भी जा सकें. झगड़ों को खत्म करने के लिए मुझे यही जरूरी लगा. मेरे इस कृत्य से जिन्हे दुख पहुंचा हो उनसे मैं पहले ही क्षमायाचना कर चुका हूं. हां एक बात और बताना चाहता हूं कि थोड़े से खर्च में प्रतियोगिता के लिए आप सभी हामी भर देते तो भी आयोजन करके इस बात की खुशी होती कि चलो झगड़े खत्म हुए. मैं कल के ब्लागर सम्मेलन में हर हाल में मौजूद रहूंगा लेकिन यह मेरा दावा है कि कोई मुझे पहचान नहीं पाएगा.
आप सभी एक दूसरे का परिचय प्राप्त कर लेंगे फिर भी मेरा परिचय प्राप्त नहीं कर पाएंगे. यह तय है कि मैं मौजूद रहूंगा. आपकी सुविधा के लिए बताना चाहता हूं कि मैं लाल रंग की टी शर्ट पहनकर आऊंगा..( बाकी आप ताड़ते रहिएगा.. सब कुछ अभी बता दूंगा तो मजा किरकिरा हो जाएगा .बाकी अविनाशजी मुझे पहचानते हैं लेकिन मैंने उनसे निवेदन किया है कि जब तक सब न पहचान ले तब तक मेरी पहचान को सार्वजनिक मत करिएगा.
आप सभी को शुभकामनाएं. अग्रिम बधाई.

माधव said...

अच्छी और भावपूर्ण

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुंदर जी

डॉ टी एस दराल said...

इसी अंतर्द्वंद को मैंने अंतर्मंथन का नाम दिया है ।
सही है ।

डॉ टी एस दराल said...

इसी अंतर्द्वंद को मैंने अंतर्मंथन का नाम दिया है ।
सही है ।

मनोज कुमार said...

जीत ही होगी!

Udan Tashtari said...

यह सभी का अंतर्द्वन्द है.

परमजीत सिँह बाली said...

बहुत सुन्दर रचना है बधाई।