Monday, May 10, 2010

यौन शिक्षा की पाठशाला (पार्ट - २)

यौन शिक्षा का मतलब समझना व समझा पाना उतना ही कठिन है जितना इस शिक्षा के अभाव के कारण जन्म लेने वाली समस्याओं से जूझना कठिन है ... मैं नहीं कहता कि यौन शिक्षा अत्यंत आवश्यक है पर इसे नजर-अंदाज करना भी बुद्धिमानी नहीं है !!

... यह संभव है कि यौन शिक्षा के कारण हमें आधुनिकता का शिकार होना पड सकता है जैसा कि पश्चिमी देशों में हो रहा है ... पर जो पश्चिमी देशों में हो रहा है वह जरुरी तो नहीं कि "यौन शिक्षा" के कारण ही हो रहा हो ... हम यह कैसे कह सकते हैं कि पश्चिमी देशों में जो समस्याएं सामने परिलक्षित हो रही हैं उसका कारण "यौन शिक्षा" ही है ... यह भी तो संभव है कि इन समस्याओं की जडें वहां के पारिवारिक परिवेश के कारण जन्म ले रही हैं !!

... क्या कोई है जो यह कह सकता है कि वहां का पारिवारिक परिवेश ऎसा नहीं है कि "यौन शिक्षा" को भी विफ़ल कर रहा है ... क्या वहां पारिवारिक संस्कार ऎसे नही हैं कि "यौन शिक्षा" भी बच्चों को बिगडने से रोक सके ... जब परिवार कि महिलाएं व पुरुष खुले रूप से व्यावहारिक आधुनिक जीवन जी रहे हों तब क्या संभव है कि कोई भी "शिक्षा" वहां असर कारक हो सकती है ...

... फ़िर क्यॊं हम या वहां के बुद्धिजीवी लोग विकृतियों को "यौन शिक्षा" की कमजोरी मान सकते हैं ... क्या हम यह नहीं कह सकते कि जहां का पारिवारिक व सामाजिक वातारण ही ऎसा हो गया हो कि वहां कोई "शिक्षा" असर कारक हो ही नही सकती !! ... फ़िर हम किसी "यौन संबंधी अनहोनी" को "यौन शिक्षा" के कारण उपजी घटना कैसे मान सकते हैं !!

... जब वहां पति-पत्नी ... माता-पिता ... भाई-वहन ... दादा-दादी ... नाना-नानी जैसे रिश्तों को कोई तबज्जो नहीं दिया जा रहा हो तो बच्चों को स्वछंद रूप से जीने से कोई कैसे रोक सकता है ... जब स्वछंदता की कोई सीमा नही रहेगी तो "यौन संबंधी अपराधों" को जन्म लेने से कैसे रोका जा सकता है ... इन हालात में जब "यौन अपराध" होना तय है तो हम "यौन शिक्षा" को इसका दोषी कैसे मान सकते हैं ???

23 comments:

संजय भास्कर said...

आप बहुत ही गंभीर विषयों पर काम कर रहे हैं।

Udan Tashtari said...

विषय विचारणीय है..समुचित यौन शिक्षा...हमेशा उचित ही होगी.

संजय भास्कर said...

वैसे यौन शिक्षा कितनी दी जाये और कैसे दी जाये

संजय भास्कर said...

वैसे यौन शिक्षा कितनी दी जाये और कैसे दी जाये

मनोज कुमार said...

संग्रहणीय प्रस्तुति!

Gourav Agrawal said...

ये सब बकवास है , हमे "योग शिक्षा" की ज़रूरत है , विदेशी तो योग कर रहे है ओर हम मूर्खों की तरह उनकी छोड़ी हुई हर चीज़ अपने जीवन मे बेवजह शामिल कर रहे हैं

Gourav Agrawal said...

read this ....

http://my2010ideas.blogspot.com/2010/03/blog-post_13.html

जरूरत है श्री कृष्ण जैसे किसी परम मित्र कि जो सिर्फ एक विचार कि वो रस्सी हमें पकड़ा दे जिसके सहारे हम सफलताओं और पवित्रता को साथ लेते हुए जीवन सच्चे सुख को पा सकें। ये मित्र अब सिर्फ वो पुस्तकें है जो हमें जीवन कि हर निराशा से बाहर निकाल सकती है । आप इसे गीता कहिये, उपनिषद कहिये , सत्साहित्य कहिये । ठीक कहा है किसी ने पढना सब जानते है, पर क्या पढना है , कोई नहीं जानता, तभी तो कार्तिक, कार्तिक को काल करता हुआ पाया जाता है ।

'उदय' said...

@Gourav Agrawal
...ये ठीक है कि आप "योग शिक्षा" के पक्षधर हैं पर किसी अन्य "शिक्षा" का विरोध करना ... क्या "योग शिक्षा" से यही शिक्षा मिल रही है कि दूसरी शिक्षाओं का विरोध किया जाये ?????

Gourav Agrawal said...

आपने ये लिखा है ना ??

.".. जब वहां पति-पत्नी ... माता-पिता ... भाई-वहन ... दादा-दादी ... नाना-नानी जैसे रिश्तों को कोई तबज्जो नहीं दिया जा रहा हो तो बच्चों को स्वछंद रूप से जीने से कोई कैसे रोक सकता है "

उनकी ये जो भी हालत हुई है इसलिए है की उनकी पिछली पीढ़ी ने भी इसी तरह की घटिया शिक्षा अपने दिमाग़ मे भर ली होगी

उनके हाल न्यूज मे देखे है तभी विरोध कर रहा हूँ

honesty project democracy said...

सार्थक विचारों और विवेचनाओं को प्रेरित करती पोस्ट / हम सब को मिलकर बच्चों को उच्च संस्कारों में ढालना होगा जिससे उनके दिमाग को सही गलत का निर्णय लेने में आसानी हो /

ललित शर्मा said...

हम तो इस विषय पर अपनी कल वाली टिप्पणी ही फ़िर से चेप रहे हैं।

बहुत अच्छे,शिक्षण ही क्यों?
अलग से डिग्री कोर्स शुरु होना चाहिए इस विषय पर। जिससे लोगों को इस विषय पर बात करने में झिझक ना हो और टीचर/मैम भी पढ़ा सकें।

arvind said...

badhiya vishay, main youn shikshaa ko uchit maanataa hun.

yadi sambhav ho to pls continue.....achchaa vichar hai.

veerubhai said...

Ham aur hamaara samaaj kaun saa doodh kaa dhulaa hai .let us search our hearts .Many of us are being sexually exploitid by our close ones ,relatives and child hood friends (you may call it consensual sex ).
sex education is a must .let the child differentiate between a good and bed intentioned touch ,sexual re- production and adult hood .I as a teacher is for it (sex education ).I am afraid we shall have to educate our parents fst .
veerubhaai 1947.blogspot.com

नरेश सोनी said...

यौन शिक्षा में बुराई क्या है भाई
आचार्य रजनीश ने कहा था कि बच्चों को 10-12 साल की उम्र तक नग्न रखा जाना चाहिए, ताकि लड़के और लड़की के भीतर यौन संबंधी सवाल जन्म ही न लें सकें। सब कुछ ढंका-छिपा है, इसलिए जानने-समझने की उत्कंठा भी बढ़ती है।

Jack said...

महोदय आपने बहुत अच्छा लिखा है इसी विषय पर मैए भी एक लेख लिखा है और चाहता हू कि एक बार आप भी उसे पढे. http://bit.ly/bgJUJD

राजभाषा हिंदी said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति।

jamos jhalla said...

शिक्षा कोई भी हो ग्रहण कर लेनी चाहिए|यौन शिक्षा के विषय में कई मिथक तोड़े जाने हैं |इससे पूर्व यौन शिक्षा और पोर्नो ग्राफी में अंतर भी झांकना होगा|

DR. ANWER JAMAL said...

@ yon shiksha ke liye ek ashram kholna chahiye .
iske alawa bhi kuchh dusre subjects par sochiyega . मैंने जो भी लिखा है आप मुझ से उसका हवाला मांग सकते हैं . मैंने तो अजित जी के ब्लॉग पर जा कर कहा कि श्री कृष्ण जी ने कभी रस लीला खेलने का पाप नहीं किया . महापुरुष समाज के सामने आदर्श पेश करते हैं . उनके बाद स्वार्थी लोग शोषण करते हैं और महापुरुषों को कलंकित करते हैं . कृपया मेरे लेख देख कर बताएं कि मेरी कौन सी बात अप्रमाणिक है ?

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लंका दहन नायक पवनपुत्र महावीर हनुमान जी ने मन्दिर को टूटने से बचाना क्यों जरूरी न समझा ? plain truth about Hindu Rashtra .

देवेश प्रताप said...

मै आपकी बात से सहमत हूँ.....

मनोज कुमार said...

संग्रहणीय पोस्ट।

राजेन्द्र मीणा said...

बड़े भाई उस दिन आपकी बात बिलकुल सही थी ..हमने फोटो बदल कर तजा फोटो लगा ली ....आपने उस दिन सही ही कहा था ..पर तरीका थोड़ा सा हमें बुरा लगा तो ...हम बेवजह ही उबल गए .......परन्तु गौर से आपकी बात पर विचार किया तो हमें लगा आप की बात उचित थी .....बस अब इतना कहूँगा की अपने इस छोटे भाई को माफ़ कर दे ...और अपने विशाल हिरदय से मुझे माफ़ीदेने के तौर पर एक सुन्दर सी टिपण्णी भेजे ,,,,या ईमेल कर दे ताकि मेरे मन का मैल दूर हो और अपनी गलती को भुला सकूं ,,,,आपको फिर से सादर प्रणाम

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

आपकी बातों से पूर्ण सहमति।
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कौन हो सकता है चर्चित ब्लॉगर?
पत्नियों को मिले नार्को टेस्ट का अधिकार?

vikas said...

सच्चई को बखूबी बयां किया है आपने ...आभार विचारणीय पोस्ट के लिए .

विकास पाण्डेय
www.vicharokadarpan.blogspot.com