Monday, April 5, 2010

समर ...

एक दिन अपने आप को
'समर' में अकेला पाया
बेरोजगारी-गरीबी-रिश्वतखोरी
भुखमरी-भ्रष्टाचारी-कालाबाजारी
समस्याओं से गिरा पाया

मेरे मन में
भागने का ख्याल आया
भागने की सोचकर
चारों ओर नजर को दौडाया
पर कहीं, रास्ता न नजर आया
किंतु इनकी भूखी-प्यासी
तडफ़ती-बिलखती आंखों को
मैं जरूर भाया

फ़िर मन में भागने का ख्याल
दोबारा नहीं आया
सिर्फ़ इनसे लडने-जूझने
इन्हें हराकर
'विजेता' बनने का हौसला आया

समर में, इनके हाथ मजबूत
आंखें भूखी, इरादे बुलंद
और तरह-तरह के हथियारों से
इन्हें युक्त पाया
और सिर्फ़ एक 'कलम' लिये
इनसे लडता-जूझता पाया

मेरी 'कलम'
और
इन समस्याओं के बीच
समर आज भी जारी है
इन्हें हराकर
'विजेता' बनने का प्रयास जारी है ।

15 comments:

Suman said...

nice

मनोज कुमार said...

एक अदम्य जिजीविषा का भाव कविता में इस भाव की अभिव्यक्ति हुई है।

M VERMA said...

समर जारी रहना चाहिये और यकीनन समर जीत लिया जायेगा
सुन्दर रचना

ललित शर्मा said...

समर में, इनके हाथ मजबूत
आंखें भूखी, इरादे बुलंद
और तरह-तरह के हथियारों से
इन्हें युक्त पाया
और सिर्फ़ एक 'कलम' लिये
इनसे लडता-जूझता पाया

विपत्ति से डटकर मुकाबला करो
उससे खुब लड़ो और खुब लड़ो
वह डर कर अपने आप जगह देगी
और आप पहुंच जाओगे मंजिल तक
स्थापित हो जाओगे उस ठिकाने पर
जो आपने चुना है,
यह मैने ज्ञानियों से ही सुना है।

संजय भास्कर said...

बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति ।

संजय भास्कर said...

बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति ।

ali said...

हौसले और आशावादिता पर आधारित अच्छी कविता !

निर्मला कपिला said...

बहुत सुन्दर रचना और ये प्रयास जारी रहना चाहिये धन्यवाद्

sandhyagupta said...

मेरी 'कलम'
और
इन समस्याओं के बीच
समर आज भी जारी है

Shayad hamare zinda hone ki wazah bhi yahi hai.

हरकीरत ' हीर' said...

ये समर जारी रहे .......!!

arvind said...

मेरी 'कलम'
और
इन समस्याओं के बीच
समर आज भी जारी है........
अच्छी कविता !

BrijmohanShrivastava said...

पहले तो कवि ने अपने आप को रिश्वत ,भ्रष्टाचार,भुखमरी, गरीबी कालाबाज़ारी आदि से घिरा पाया और दूसरे पद मे इन जिम्मेदारियों से भाग जाने का मन हुआ (पलायनबाद) फ़िर तीसरे पद मे एक हौसला जैसे कृष्ण ने अर्जुन को गीता सुना दी हो ।यह समर न जाने कब से जारी है और न जाने कब तक रहेगा

राज भाटिय़ा said...

्समर हमेशा जारी रहेगा

डॉ टी एस दराल said...

होसला बुलंद रहे , समर जारी रहे ।

संजय भास्कर said...

यह समर न जाने कब से जारी है और न जाने कब तक रहेगा