Thursday, March 11, 2010

ईश्वर / GOD

मैं चलता हूं
अपनी राहों पर
आवाज देकर न बुलाऊंगा

तुझको आना है
तो आजा मुझ तक
तुझे भी, तेरी मंजिल
पर पहुंचाऊंगा

तेरी मंजिल पर
शुभकामनाएं देकर तुझको
मैं अपनी राहों पर निकल जाऊंगा ।

5 comments:

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुंदर कविता जी

मनोज कुमार said...

विचारोत्तेजक!

डॉ टी एस दराल said...

बहुत सुन्दर ।
नेकी कर , आगे चल।

संजय भास्कर said...

बहुत सुंदर और उत्तम भाव लिए हुए.... खूबसूरत रचना......

संजय कुमार
हरियाणा
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

अल्पना वर्मा said...

'तेरी मंजिल पर
शुभकामनाएं देकर तुझको
मैं अपनी राहों पर निकल जाऊंगा'
--बहुत खूब!