Saturday, April 18, 2009

जूता फेंको आंदोलन - 1

जूता फेंको आंदोलन का उद्देश्य क्या है ?
जूता फेंको आंदोलन के उद्देश्य में क्या सफलता मिल पायेगी ?
अमरिका के राष्ट्रपति जार्ज बुश पर जूता क्यों फेंका गया ?
भारत के गृहमंत्री पी. चिदंबरम पर जूता क्यों फेंका गया ?
हरियाणा के कांग्रेसी नेता नवीन जिंदल पर जूता क्यों फेंका गया ?
भाजपा नेता लालकृष्ण अडवाणी पर जूता(खडाउ चप्पल) क्यों फेंकी गई ?
असम के कांग्रेसी सांसद अनवर हुसैन पर कनबरी गाँव मे जूते क्यों फेंके गये ?
राजनैतिक हस्तियों पर ही जूते क्यों फेंके जा रहे हैं ?
जूता फेंको आंदोलन . . . . . . . . . . . . ?

12 comments:

"अर्श" said...

sahi sawaal.........

-श्याम said...

जूते फ़ेंकना या मारना-क्या कहता है यह तो सब जानते हैं ।
बुश के ऊपर जूता फ़ेंकने वाले का तो उदेश्य था तथा वह पूरा हुआ।यानि महाबली को उसकी औकात दिखाना,
लेकिन भारतीय संदर्भ में कुछ बातें
-जूता फ़ेंकने वाला-अपने को मीडिया में लाना चाहता था
-यह विरोधी-अपनी पार्टी में विरोधियों की चाल
-या फ़िर विरोधी पार्टी की चाल
-या भारतियों की नकल करने की प्रवृति बस
श्याम सखा ‘श्याम’

अल्पना वर्मा said...

अंडे टमाटर--जूतों से महंगे हो गए हैं शायद!या फिर जूतों के दिन फिर गए..उनकी तस्वीर जो मीडिया में आ रही है..अब शायद जूते वाली कंपनियां भविष्य में ऐसे इवेंट्स' को स्पोंसर भी कर दें!

अल्पना वर्मा said...

खैर jo भी यह हो रहा है..बहुत ही बुरा है..आक्रोश दिखाने का सही तरीका नहीं है.

Anonymous said...

उदय जी
क्या जूते इस देश मे रंग लायेगे!
भ्रष्टाचारी नेता क्या जूते के भय से अपनी चाल्ढाल सुधारेगे!
क्या जूते ही एक मात्र विकल्प हो गये है इस देश के हालात सुधारने के लिये!

Babli said...

मुझे आपका ब्लोग बहुत अच्छा लगा ! आप बहुत ही सुन्दर लिखते है ! मेरे ब्लोग मे आपका स्वागत है !

मोना परसाई "प्रदक्षिणा" said...

sasti pblisiti pane ka nya trika feshan men aya hae-jute phekna

Science Bloggers Association said...

जूना फेको आंदोलन जिन्‍दाबाद जिन्‍दाबाद।

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खुशियों का विज्ञान-3
एक साइंटिस्‍ट का दुखद अंत

Harkirat Haqeer said...

इस से साबित होता है कि हमने सिर्फ दूसरो की नक़ल करना सीखा है बुश पर जूता फेंकने वाले पत्रकार की वाहवाही हुई बस चल पड़ीं भेडें उधर .... !!

mark rai said...

जूता फेंको आंदोलन के उद्देश्य में क्या सफलता मिल पायेगी ?
.......in my opinion it is only a seasonal movement.

ARVI'nd said...

sahi tareeka nahi hai. par is nakaaratmak uttar me bhi kai sawal cheepa hua hai.

रश्मि प्रभा said...

ab isi ka zamaana hai,sanskaaron ka koi mol nahi raha......