Tuesday, March 3, 2009

शेर - 14

खंदराओं में भटकने से , खुली जमीं का आसमाँ बेहतर
वहाँ होता सुकूं तो, हम भी आतंकी बन गये होते।

2 comments:

राज भाटिय़ा said...

पहले तो मे चोंका फ़िर ध्यान से पढा तो आप का शेर अच्छा लगा.
धन्यवाद

प्रकाश बादल said...

वाह भाई वाह मज़ा आ गया