Wednesday, September 17, 2014

हुस्न औ जिस्म …

सच ! जब तक मिले नहीं थे उनके औ मेरे मिजाज 
कुछ वो भी अजनबी थे, कुछ हम भी थे अजनबी ?
… 
'उदय' क्या बताएगा ये तुम हम से पूछों यारो 
इश्क में, बड़े बड़े 'शेर' भी 'चूहे' नजर आते हैं ? 
… 
डगमग डगमग हैं हम, औ डगमग डगमग है दिल हमारा 
वो पास से गुजरे हैं ……… या भूचाल आया था 'उदय' ?
… 
उनसे मिलना भी इक बहाना था 
औ  
बिछड़ना भी …… इक बहाना है 
हुस्न औ जिस्म … 
बगैर करतब के कब मिलते हैं 'उदय' ?
… 
वो भी डरते हैं हम भी डरते हैं 
देखो ख्याल हमारे कितने मिलते हैं ? 

1 comment:

राजेंद्र कुमार said...

आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (19.09.2014) को "अपना -पराया" (चर्चा अंक-1741)" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है, धन्यबाद।