Thursday, May 1, 2014

दीवानगी ...

उफ़ ! लो 'उदय', अब 'फ़ायदा' भी,.... 'आम' और 'ख़ास' हो गया है 
उनका कहना है कि, उन्ने, उनका, कोई खास फ़ायदा नहीं उठाया ?
… 
फर्जी प्रचार औ फर्जी दुष्प्रचार 
सिर्फ, दो ही एजेंडे हैं उनके ??
… 
थोपे गये, और थोपे जा रहे, दोनोँ ही घातक हैं 'उदय' 
उफ़ ! लगता है इस देश का कोई माई-बाप नहीं है ??
… 
हम तो कायल हैं तेरी दीवानगी के 
तू कुछ कह तो सही, उसे ही हम गजल समझ लेंगे ? 
… 
सच ! उन्हें भी खबर है, और उन्हें भी खबर है 
कि हम, … सिर्फ और सिर्फ … इंकलाबी हैँ ? 

1 comment:

राजेंद्र कुमार said...


आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (02.05.2014) को "क्यों गाती हो कोयल " (चर्चा अंक-1600)" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, वहाँ पर आपका स्वागत है, धन्यबाद।