Saturday, February 9, 2013

घमंड ...


साहब जी ...

साहब जी,... न तो आप मेले में दिखते हैं 
और न ही, ... किसी झमेले में !
आखिर आप होते कहाँ हैं ? 
बस, .......................यूँ समझ लो ... 
होते सब जगह हैं ...
पर...................दिखते कहीं नहीं हैं ??
... 
घमंड ...

एक मूर्ख ने दूसरे मूर्ख से कहा - 
'बाबाजी' नाराज हैं तो रहने दो ... 
हमारा क्या उखाड़ लेंगे !
ठीक तभी ... 
वहां पड़े ... ढेरों अधमरे ...
अचानक उठ खड़े हुए ... 
और बोले - 
ठीक यही घमंड हमें भी था ???

2 comments:

अरूण साथी said...

karba sach

Shiv Kumar said...

बहुत सुंदर ....
कभी समय मिले तो हुय्मारे ब्लॉग पर भी पधारें ...धन्यवाद .