Sunday, June 3, 2012

खुदगर्जी ...


ऐ दोस्त ... तेरी खुदगर्जी 
जिसे तू ... 
अपना हथियार समझता है 
ये हथियार 
बेहद प्राणघातक है !
किन्तु ... 
ये किसी और के लिए नहीं 
वरन 
खुद तेरे लिए ... प्राणघातक है !!
देखना ... संभल के रहना 
कहीं ... किसी दिन 
ये ... तेरी ही जान न ले ले ? 

3 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

खुदगर्जी तो सबके लिये ही घातक है।

Rajesh Kumari said...

आपकी इस उत्कृष्ठ प्रविष्टि की चर्चा कल मंगल वार 29/5/12 को राजेश कुमारी द्वारा
चर्चामंच मंच पर की जायेगी |

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

वाह!
बहुत खूब
सादर