Monday, April 2, 2012

लाल सलाम ...

घने जंगलों में ... बीचों-बीच ...
शहर से दूर ... शोर-गुल से दूर
सिर्फ ... पंद्रह बन्दूक धारियों की एक टोली
जिसे "नक्सली दलम" कहा जाता है
ने एक जन अदालत लगाई
गाँव ... आस-पास के आठ-दस गाँव के
प्रमुख, प्रधान, मुखिया, पंच, सरपंच, पटेल, कोटवार
महिलाएं, पुरुष, बच्चे ...
छोटे, बड़े, बुजुर्ग ... बुलाये गए ...
सब ... हाजिर हैं ...
देख रहे हैं ... सुन रहे हैं ... सब के सब खामोश हैं
बंदूकों के साये में ... खौफ ... दहशत ...
एक बन्दूकधारी कमांडर ... दहाड़ते हुए ...
ये भूखनपल्ली गाँव का सरपंच ... दुकालू ... मुखविर है ...
पुलिस का मुखविर ...
ठीक अगले ही पल ... उसे ...
इमली के पेड़ पर
फांसी पर लटका दिया ... फिर ... एक जोर की दहाड़ ...
पुलिस के मुखविरों का यही अंजाम होगा ...
चारों ओर ... सन्नाटा ... पसर गया
ठीक तभी ... एक बन्दूकधारी ने
दहाड़ते हुए ... लाल सलाम का नारा लगाया
अगले पल ... लाल सलाम ... लाल सलाम ... लाल सलाम ...
के नारे गूंजने लगे ...
सारे लोग ... सन्न ... चारों तरफ ... खौफ ... दहशत ...
मन ही मन सोचते हुए ...
कि -
क्या सचमुच ... दुकालू पुलिस का मुखविर था ?

2 comments:

परमजीत सिँह बाली said...

विचारणीय पोस्ट।

प्रवीण पाण्डेय said...

पता नहीं, वह तो लटक गया।