Tuesday, April 3, 2012

रिश्ते ...

सच ! तेरी तारीफ़ करूँ, या तेरे मंसूबों की
जुबां पे कुछ, तो आँखों में कुछ और है !!
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इस शहर में किसे आईना दिखाएँ हम 'उदय'
सच की आज किसे दरकार है ?
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बा-अदब तेरे जज्बे को सलाम
कम से कम रिश्ते को तूने दोस्ती का नाम तो दिया !