Saturday, April 28, 2012

बात का बतंगड़ ...


'उदय' सुन लो ज़रा, वो जिनकी चीख सुनकर इंकलाबी हो गया था 
जब गूंगे हुए खुद वो, तो उसकी मौत का फरमान जारी हो गया !!!
... 
रखो संभाल के खुद को, कि शहर लुटेरा है 
नहीं है कोई यहाँ ऐंसा, जो बख्श दे तुमको 
... 
उसे लिफ्ट देकर, हम बुरे फंसे हैं 'उदय' 
उफ़ ! बात का बतंगड़ हो रहा है !!

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