Monday, April 16, 2012

मगरूर ...

उनके जेहन में भी 'उदय', खूब ख्याली पुलाव पक रहे हैं
जिन्हें आज, कदम-कदम पर चेलों की दरकार है !!
...
वो मगरूर तो है, पर उनके लिए नहीं है 'उदय'
जो, सुबह-औ-शाम उसका नाम गुनगुनाते हैं !
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लो, आज उन्हें भी, जिंदादिल की उपाधि से नवाजा गया है
जिनका दिल धड़कता है, तो सिर्फ खुद के फायदे के लिए !!

1 comment:

प्रतीक माहेश्वरी said...

कडुवे सच हैं सभी के सभी!