Sunday, April 1, 2012

गुमां ...

तुझपे भी उतना, जितना खुद पे एतबार है हमको
पर, 'सांई' की मर्जी, तो 'सांई' ही जाने है !!
...
सच ! न कर गुमां, तू अपनी खुबसूरती पर
दिल हमारा तो, तेरी अदाओं का कायल है !
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देखना ! मेरा नाम लेते लेते, तेरी जुबां न लड़खड़ाए
भले चाहे तू दूजे पल, मुझे अपना रकीब कह देना !!

1 comment:

परमजीत सिँह बाली said...

बहुत बढिया रचना है। बधाई स्वीकारें।