Monday, February 6, 2012

खुदा हाफिज ...

उसने
एक एक हजार के
पांच नोट
लेते ही
मिनी बैग में रखे पर्स में ठूंसे
फिर, बैग से निकाल कर
सलवार-कुर्ती पहनी
चूड़ियाँ पहनीं
माथे पे बिंदिया लगाई
आँखों में काजल
होंठों पर लिपस्टिक
कान में झुमके
गुलाबी रंग का दुपट्टा निकाल कर
सादगीपूर्ण ढंग से सिर पे ओढ़ा
अंत में
बिस्तर पर पडी
अपनी सतरंगी मिनी फ्राक उठा
पर्स में ठूंस कर ... जाते हुए
बोली -
साहब, खुदा हाफिज ... !!

2 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

तीक्ष्ण..

वन्दना said...

बहुत ही कडवा सच लिख दिया।