Saturday, October 22, 2011

पाठक की कसौटी पे लेखन !!

किसी भी लेखन को -
पढ़ते समय
मैं नहीं देखता
कि -
लेखक
बड़ा है, या छोटा है !
गर देख लूं
तो शायद मैं लेखन को,
दाद -
सच्चे मन से
सच्चे दिल से
एक पाठक के नजरिये से
शायद ! न दे पाऊँ !!

क्यों, क्योंकि -
उस समय मेरे जेहन में
लेखन नहीं, लेखक होगा
वो छोटा, या बड़ा होगा
और जब मैं
यह देख लूं कि -
लेखक बड़ा है, तो निसंदेह
मेरी अभिव्यक्ति
लेखन के दायरे से ऊपर होगी
और यह देख लूं कि -
लेखक छोटा है
तो शायद
मैं नजर-अंदाज भी कर जाऊं
लेखन को !

इसलिए -
इन दुर्भावनाओं से
खुद को दूर रखता हूँ
किसी भी
लेखन को पढ़ते समय
दाद देते समय
यह कतई नहीं देखता
कि -
लेखन से भी कोई -
ऊपर है, ऊपर हो सकता है
फिर भले चाहे
वो, कोई भी, क्यूं न हो !
क्यों, क्योंकि -
मैं एक पाठक हूँ !!

2 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

लेख पर ही ध्यान रखा जाये, लेखक का नाम अन्त में आये।

महेन्द्र मिश्र said...

Pathak ki drashti men lekhak se adhik mahatvapoorn lekh hote hain ..sateek prastuti..