Monday, October 24, 2011

... अंधेरा ही अंधेरा है !!

आज ऊंची-ऊंची दीवारों पे
रौशनी खूब जग-मगाई है 'उदय'
कम से कम तुम तो
उन घरों, उन आँगनों में
दीपक बन के जल जाओ
जहां, शाम से नहीं -
सदियों से अंधेरा ही अंधेरा है !!

3 comments:

जाट देवता (संदीप पवाँर) said...

शुभ दीपावली,

ब्लॉ.ललित शर्मा said...

दीप पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं

सागर said...

bhaut khub happy diwali...